A new start

अतीत को भूलकर एक नयी शुरुआत करें : विनीता खंडेलवाल

स्वयंमंथन के भाग 26 में आज अस्मिति एकेडमी के वेबिनार मंच पर हमारी वक्ता रहीं “श्रीमती विनीता प्रशांत खंडेलवाल”।
श्रीमती विनीता प्रशांत खंडेलवाल एक साधारण महिला हैं, एक सामान्य भारतीय परिवार में पली-बढ़ी, पर कुछ विशेष गुणों से समृद्ध। विनीता जी आज समाज को एक स्वस्थ और सुंदर दिशा दे रही हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ नया करने की ललक उनके मन में हमेशा से ही रही, उनके पति ने और परिवार ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया, साथ में गायत्री परिवार का भी सहयोग मिला और परिणाम स्वरूप वह एक असाधारण से मिशन की ओर बढ़ चली। यह असाधारण मिशन था, विभिन्न जेलों में रह रहे बंदीजनों से मिलना, उनमें सकारात्मक भाव पैदा करना, उन्हें अपने अतीत को भूल कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और सामान्य जीवन जीने की ओर प्रोत्साहित करना।

जब उन्होंने पहली बार जेल में जाकर बंदी जनों से मिलने का कार्यक्रम बनाया तो अपने आप को मानसिक तौर पर बहुत मजबूत किया, अपनी एक टीम व गायत्री परिवार के सहयोग से वहां कई बंदीजनों से मिलीं, उनके साथ बैठकर गायत्री हवन किया, उनकी बातें सुनी और उनमें एक हिम्मत पैदा की कि वे अपने अतीत को भूलकर जिएं। उन्होंने बंदी जनों से कहा कि आपसे जो कुछ अतीत में किसी कारणवश या जाने अनजाने में हुआ है, उसको भूल कर जीवन की एक नई शुरुआत करें, अपने आप को मजबूत बनाएं, निखारें किसी सकारात्मक काम में अपने आप को लगाएं, जीवन की ओर रुचि बढ़ाएं, पढ़ने की ओर रुचि बढ़ाएं और कुछ लघु व्यवसाय की ट्रेनिंग लें व अपने आप को बदलें।

अपने टीम के इस नियमित कार्यक्रम का प्रभाव यह होने लगा कि जेल में रहने वाले बंदीजनों में बदलाव दिखाई देने लगे, वे अपने जीवन को सकारात्मक ढंग से जीने लगे। अब उनमें से कई अपनी निश्चित समय सीमा को समाप्त कर बाहर आकर एक साधारण सामान्य जीवन जीने लगे हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित हो रहे हैं।

विनीता जी का कहना है कि गायत्री परिवार उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनकी टीम से हिम्मत पाकर बंदी भाईजन आज अच्छा जीवन जी रहे हैं, अपने पुराने व्यवसाय को फिर से संभाल रहे हैं और अपने अंदर उपजे द्वेष, क्रोध की भावना को खत्म कर रहे हैं। वे अपने अनुभव भी इनसे साझा करते हैं और बताते हैं कि जो गलती हम से हो गई है उसे भूल कर हम अब अपने लिए नया आसमान बुन रहे हैं। यह एक असाधारण बदलाव है जो स्वस्थ समाज का निर्माण करता है।
इसके अलावा विनीता जी अपनी टीम के साथ मिलकर वृद्ध आश्रम जाती हैं, उन्हें हर संभव सहायता करती हैं। उनके जीवन के अनुभवों को सुनती हैं और उनमें भी खुशी का संचार करने की कोशिश करती हैं। दिव्यांग जनों के विषय में भी विनीता जी का कहना है कि हम समाज के किसी भी व्यक्ति को कमतर ना आंकें। उनके साथ जो कमी है उन्हें उसी रूप में स्वीकार करें। वे भी हमारी तरह सामान्य जीवन जीएं, उनमें हीन भावना पैदा ना होने दें, उनकी काबिलियत पर भरोसा करें, उन्हें सम्मान दें।बिल्कुल ऐसे ही वे आगे कहती हैं कि किन्नर बहनों को भी सम्मान दें, उनका अपमान ना करें, उनको उनके शरीर यह जन्म के आधार पर ना बांटें। उन्हें मानसिक सपोर्ट दें, उन्हें उनके अतीत से बाहर निकाल कर सुंदर और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करें। उन्हें बताएं कि वे सब भी हमारी तरह हर अच्छे कार्य करने में सक्षम हैं।
उनका मानना है कि हमारे कर्तव्य बनता है कि हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें, आज की भागमभाग वाले माहौल में उन्हें जीवन के प्रति समर्पित और सकारात्मक बनना सिखाएं। घर के बुजुर्गों की छांव में उन्हें आकार लेने दें, तो हम उन्हें एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बना सकते हैं।
अस्मिति एकेडमी के प्रयास से हम हर रविवार एक ऐसे हस्ताक्षर से मिलते हैं जो समाज को स्वस्थ बनाने और उसे नई दिशा देने में हमेशा प्रयासरत रहते हैं। उन सभी का बहुत-बहुत आभार।

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