सीमा के प्रहरी

देश के वीर जवानों को समर्पित

सीमा के प्रहरी
सीमा पर बैठे हैं हमारे जो प्रहरी,
करते रखवाली देश की सुबह शाम दोपहरी।
करें हम उन वीर जवानों को नमन,
जो बनाए रखते देश में शांति और अमन।

गर्मी की तपती दुपहरी हो या हो आंधियां,
बर्फीले तूफान हों या हों कंटीली झाड़ियां,
रुकते नहीं इनके कदम किसी हाल में,
मातृभूमि के ये लाल, दृढ़ता है जिनकी चाल में।

हंसते- हंसते ये दे देते अपने जीवन की कुर्बानी,
हैं देते लुटा भारत मां पर अपनी जवानी।
भारत मां है वीर-वीरांगनाओं की जननी,
है दाल नहीं कभी दुश्मनों की यहां गलनी।

बिछाए दुश्मन कितना भी बड़ा जाल,
टूट पड़ते हैं ये जांबाज बनकर महाकाल।
है सीना इनका फौलादी, इरादे हैं पक्के,
नहीं टिक सकता दुश्मन कोई सामने इनके।

वारि-वारि जाए इनपर देशवासियों का तन-मन,
जो करते न्योछावर देश पर अपना जीवन।
करें प्रतिज्ञा हम सभी ये आज मिलकर,
हम भी लुटाएं जीवन अपना भारत मां के चरणों पर।

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