शाम का पैगाम


ये सुहानी शाम है लाई ये पैगाम है।
आओ दिल से दिल मिला लें,
रंजोगम सारे मिटा दें।
भूल कर हम भेद सारे,
इस शाम को रंगी बना दें।
कह रही है ये फिज़ा,
कभी न होंगे हम जुदा।
कर हृदय के तार झंकृत,
साथ रहें हम तुम सदा।
दिल ने दिल को है पुकारा,
बिछड़ना न कभी तुम ओ यारा।
मन की वीणा के सुरों ने,
नाम लिया है बस तुम्हारा।
इस शाम के पैगाम को
होने न देंगे व्यर्थ हम।
जलायेंगे दिलों में प्रेम दीपक,
झूमेंगे मगन हो मस्त हम।
आ,आ की बहारें भी हैं
अब साथ हमारे।
मदमस्त पवन के हिलोरें,
ये महकती बसंती बयारें।
तेरी बाहों के सहारे,
कर लेंगे हर संकट को किनारे।
मिल कर चलें जो साथ हम तुम,
रास्ते आसां हो जायेंगे हमारे।
बढ़ते चलें हम जीवन डगर पर,
थाम कर एक दूजे का हाथ।
पार कर लेंगे इस सफ़र को,
हम चलते हुए साथ – साथ।

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