मन


मन बावरा है तितली बनकर उड़ता ।
कभी अतीत की यादें तो कभी भविष्य के ताने-बाने बुनता ।
तिमिर घोर अन्धकार हो या
सूरज से चमकती ऊषा की बेला,
मन तो अपनी उड़ान भरने
चल पड़ता सुदूर बस अकेला।
इस मन की ताकत है अनोखी है
ये वो कर दिखाता जो न थी सोची
कहते हैं मन के हारे हार है मन के जीते जीत।
मन की ताकत से लेंगे हर ज़ंग जीत।
जिसने मन को दृढ़ बनाया
और निश्चित लक्ष्य कर पाया,
पाई उसने सफलता और
जग में नाम कमाया।
जिसने मान ली अपनी हार
वह नहीं आगे बढ़ पाया।
असफलता से न घबराएं ,
सबक रुप में उसे अपनाएं।
नये जोश और नये उमंग से
अपना अगला कदम बढ़ाएं।
हर मोड़ पर जीवन के हैं बाधाएं,
बाधाओं पर विजय का परचम लहराये।
हर आने वाली नूतन भोर
कर दे मन को जोश से सराबोर,
चल पड़ें कदम लक्ष्य की ओर
थामे दृढ़ता से सपनों की डोर।

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