नई सुबह

उठ भोर हुई सजनी,
अब अलसाई आंखें खोल l
सूरज की किरणें जगमगाई,
पक्षी करने लगे किलोल l
गात लाल हुए आसमान के,
धरती पर हरियाली छाई,
मंद पवन के मस्त झकोरों ने,
विटप वृंद में हलचल मचाई।
सोई कलियों ने आंखें खोली,
ली अंगड़ाई और मुसकाई।
देख सुनहरी किरणों को
बन फूल खुशबू फैलाई ।
जग सारा महक उठा है
सारी वसुधा हुई गतिमान ,
जीवन चक्र है चल पड़ा
भूल कर बीता मान-अपमान।
यही सत्य है जीवन का,
हर शाम के बाद सवेरा है।
याद रहे फिर सुबह आएगी,
चाहे अभी कितना भी अंधेरा है।
उठ जाग सखी अब तू भी,
नूतन ऊषा का रसपान करें।
इस नई सुबह में नये संकल्प से
नव जीवन संचार करें।

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