अम्मा

उस झीनी सी फुहार में, स्नेह के गुबार में,
अहा, मीठी सी पुकार में, किसी ने जब ”अम्मा……”
गुनगुनाया,
अम्मा तेरा ही खयाल आया।
लरज़ती आवाज़ में, दरकती सी दहाड में,
जब खनकती सी फुसफुसाहट में, “सब ठीक है…….”
बुदबुदाया,
हाँ अम्मा, तेरा ही ख्याल आया।
कुम्हलाई हथेली ने, पथराई नज़रों ने,
डबडबाई पलकों ने, जब उसे “थपकी दे…….”
सहलाया।
हाँ सच अम्मा, तेरा ही ख्याल आया।
अपनी परेशानी में, जीवन की रवानी में,
तीज-त्योहारों की कहानी में, कुछ “झाँकता….”
सा नज़र आया।
अम्मा बस, तेरा ही ख्याल आया।
हाँ, तेरा ही ख्याल आया॥

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