मैं हूँ चौकीदार

मैं हूँ चौकीदार
सर्दी हो या गर्मी या हो बरसात
हर वक़्त रहता ड्यूटी पर तैनात ।

घरवाली करती दूसरे घरों में काम
नन्ही गुड़िया को ले जाती साथ
बड़ा बेटा आता मेरे संग
उम्र है जिसकी सात साल ।
सीधा तना रहता गेट पर देता पहरा
सारा दिन मटर गश्ती करता बेटा मेरा

साहबों के बच्चे जाते स्कूल
पहन यूनिफॉर्म
मैं हर वक़्त करता उन्हें सलाम
नुक्कड़ में दुबक मेरा बच्चा
ताकता उनको कर आंखें हैरान ।
जब तक बच्चे पढ़ कर
लौटते दुपहरी को
तब तक यह नन्हा
मिट्टी से होता लथपथ ।
एक घंटा मिलती लंच ब्रेक
धुलवाता उसके मुँह हाथ
खाना खाते दोनों बैठ साथ
कुछ पल मिलता सुख आराम ।
कभी कभार उसे लगती जल्दी भूख
देता दिलासा, इंतज़ार करना सीख ।

खाना खाते ही आँखों में
भर आती नींद
पेड़ की छाया देख
बिछा चादर सुला देता वहीं ।
शाम को होकर बेचैन
करता माँ को याद
बाबा घर चलो-घर चलो
की करता फ़रियाद ।
बार बार घड़ी देखता
हर पल लगता कठिन
कहता —
कल आपके साथ नहीं आऊँगा
जो मुमकिन नहीं ।

क्योंकि मैं हूँ चौकीदार ।।

0 thoughts on “मैं हूँ चौकीदार”

  1. मधु खंडेलवाल‌ मधु खंडेलवाल‌ says:

    सच में एक चौकीदार जो अपने ही सपने की चौकीदारी वही करपाता,,,,आइये टिमटिमाते दीपक में स्नेह भरें उस बच्चे को आखर की ताकत समझा दें चलो सखी थोड़ी देर पढा़ दें।

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