प्रकृति – हमारी परम मित्र

अत्यंत गहरा है पारस्परिक सम्बन्ध – प्रकृति और मनुष्य का I मनुष्य का अस्तित्व पूर्णतया प्रकृति पर ही निर्भर है I प्रकृति फलती है, मुस्कुराती है तो मानव भी फलता है I लेकिन यदि प्रकृति लड़खड़ाती है तो मनुष्य का लड़खड़ाना निश्चित ही है I प्रकृति ईश्वर का ही अद्वितीय रूप है जो सदैव से ही मानव जाति का पालन पोषण करती आ रही है I  अपने अहम् को स्थापित करने में भले ही मानव प्रकृति से खिलवाड़ करता रहा है एवं उस पर विजय प्राप्त करने को उत्सुक रहता है – प्रकृति फिर भी मुस्कुराती हुई उसे क्षमा करती रही है I मित्रता का हाथ बढ़ाये रहती है I लेकिन मानव है जो  प्रकृति के अनुकूल न चल कर प्रकृति को ही अपने अनुकूल चलाना चाहता है I फल स्वरुप प्रकृति का आक्रोश विभिन्न प्रकोपों – बाढ़, सूखा, भूकंप, रोग इत्यादि विपदाओं के रूप में फूट पड़ता  है I

 यदि गूढ़ता से विचार करें तो हम पाते हैं कि  हमारा जीवन पूर्णतया प्रकृति से ही प्रभावित है ।   प्रकृति का जीवन में प्रभाव –  इस सन्दर्भ में स्वयं  के एक उद्धरण – “प्रकृति से मित्रता की गहराई जितनी अधिक – जीवन स्वस्थ एवं सुखी उतना ही अधिक” का यहाँ उल्लेख करना चाहूंगा I स्वस्थ एवं प्रसन्न जीवन के लिए अब यह एक मूल मंत्र बन चुका है I मनुष्य जब भी कठिनाई में होता है अथवा अस्वथ होता है तब वह स्वयं को प्रकृति की शरण में जाने को विवश पाता है और तब उसे आभास होता है कि प्रकृति ही ईश्वर है एवं ईश्वर ही प्रकृति है Iआईए जाना जाए कि किस प्रकार से प्रकृति ऐसी दशा में मनुष्य की सहायता करती है I

प्रकृति स्वस्थ करती है – कल्पना कीजिये आप प्रकृति में खोए हैं अथवा प्राकृतिक दृश्यों को निहार रहे हैं – यह क्रिया आपके क्रोध, भय तथा तनाव को कम करती है एवं आपके अन्तःस्तल  में प्रसन्न भावना को जन्म देती है I प्रकृति के संपर्क में आप भावनात्मक रूप से अच्छा अनुभव करते हैं I साथ ही साथ अपितु वह  आपके रक्तचाप, हृदय गति,  मांसपेशियों में तनाव की दर  तथा तनाव हार्मोन के उत्पादन को नियंत्रित करते हुए शारीरिक स्वस्थता की भी देखभाल करता है I अस्पतालों, कार्यालयों एवं स्कूलों में एक शोध के अनुसार यह पाया गया कि कमरों में एक पौधे की उपस्थिति भी  तनाव एवं उत्सुक्ता पर अत्यधिक प्रभाव डालती है I

प्रकृति सांत्वना देती है पीड़ा सहने में प्रकृति अत्यन्य सहायक सिद्ध होती है I इसका कारण है मानव शरीर का आनुवंशिक रूप से क्रमादेशित होना I मनुष्य  पेड़ –  पौधों, जल, वायु तथा अन्य प्राकृतिक तत्वों में अधिक तल्लीन अथवा मग्न रहता है I उसे   प्राकृतिक सौंदर्य में खोना अधिक आनंदित एवं सुखदायी लगता है I प्राकृतिक दृश्य उसे पीड़ा से विमुख होने में सहायक होते हैं I किसी अस्पताल में एक प्रयोग में आधे रोगियों, जिनकी सर्जरी होनी थी, के सामने कमरे की दीवार पर वृक्ष के दृश्य थे  तथा अन्य रोगियों के कक्ष में सामने की दीवार पर कोई भी प्राकृतिक दृश्य नहीं केवल समतल दीवार थी I चिकित्सक जिसने यह शोध किया उसके अनुसार वृक्ष के दृश्य की ओर देखने वाले रोगियों को पीड़ा सहने में कम कठिनाई हुई तथा उनमें नकारात्मकता के भाव कम पाए गए I इसके अतिरिक्त अस्पताल में भी कम समय रहना पड़ा I

प्रकृति पूर्वावस्था प्राप्त करने में सहायक होती है – यदि आप तनावग्रस्तहैं , उत्सुकता एवं निराशा ग्रस्त में हैं तो आप बाहर  प्रकृति की घनिष्टता में समय व्यतीत कीजिये I प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लीजिए और प्रकृति की छठा में खो जाईये I प्रातःकाल उदित होते सूर्य की लालिमा में खो जाइये I शीतल पवन के झोकों का आनंद लेते हुए नाचती पत्तियों को, नभ में उड़ते पक्षिओं की ओर निहारिये I समय निकाल कर रात्रि में आकाश की ओर टकटकी लगा कर टिमटिमाते तारों एवं मुस्कुराते हुए चन्द्रमा को देखिये I

प्रकृति ऐसे असंख्य मनमोहक दृश्यों से भरी हुई है जो आपकी प्रतीक्षा करते रहते हैं I   और फिर देखिये प्रकृति का चमत्कार एवं आप के ऊपर  प्रभाव I अपनी मनोदशा में आये परिवर्तन का ध्यान से समीक्षा कीजिये – क्या पाते हैं ? एक अदुभुत, अविश्वनीय सकारात्मकता से ओत प्रोत अंतरात्मा I प्रकृति के साथ व्यतीत किया गए समय का सीधा संबंध  मनुष्य की स्वस्थ मानसिकता, मनोदशा एवं आंतरिक उर्जा से है I यही नही प्रकृति से मित्रता अथवा घनिष्ठता किसी भी कार्य पर ध्यान लग्न होने की योग्यता में अत्यधिक बढ़ावा देती है I

प्रकृति परस्पर संपर्क स्थापित करने में सहायक होती है – आप कई बार प्राकृतिक स्थलों, उद्यान, पर्यटक स्थलों या ऐसे कई स्थानों पर गए होंगे – नए नए सहपर्यटको से परिचय हुआ होगा I कई बार आश्चर्यजनक रूप से पुराने बिछड़े मित्रों से अचानक मिलना हुआ होगा I मन प्रफुलित्त हो उठता है ऐसे अवसरों पर I ऐसे अनगिनत उदाहरण आप स्वयं अपने जीवन में पा सकते है जिनका सुखद अनुभव आपको अब भी रोमांचित कर देता है तथा आपमें एक नई उर्जा का संचार कर देता है I प्रकृति चमत्कारों का बहुमूल्य पिटारा है I

निष्कर्ष यह है कि प्रकृति का सम्मान करते हुए, हमें प्रकृति के ही नियमों का निरंतर अनुशासित ढंग से पालन करते हुए, उसी की घनिष्टता में रहने का अथक प्रयास करते रहें I एक सफल, सुखी, आनंद से भरपूर स्वस्थ जीवन की यही एकमात्र कुंजी है I

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