Category: Literature

मन

मन बावरा है तितली बनकर उड़ता ।कभी अतीत की यादें तो कभी भविष्य के ताने-बाने बुनता ।तिमिर घोर अन्धकार हो यासूरज से चमकती ऊषा की बेला,मन तो अपनी उड़ान भरनेचल

कुछ पल अपने नाम

बाहरी दुनिया कीखिड़कियाँ बंद करकेघर की चारदीवारी मेंमैंने बहुत सुकून पाया ।कान बंद किए ताकिबाहरी शोर न आने पाएअब तो बंद कानों से हीअंदर की आवाज़ सुनी जाए । दिखावे

नई सुबह

उठ भोर हुई सजनी,अब अलसाई आंखें खोल lसूरज की किरणें जगमगाई,पक्षी करने लगे किलोल lगात लाल हुए आसमान के,धरती पर हरियाली छाई,मंद पवन के मस्त झकोरों ने,विटप वृंद में हलचल

नारी

ममत्व, सहिष्णु, धात्रीदुर्गा, लक्षमी, गायत्रीसशक्ति, की प्रतिरुपा हैनारी, महिला, कोमलता के हर रुपएक दिनी ,सम्मान नहीं,मानो,पल पल,हर क्षणस्नेह, भाव, अनुरूप

आक्रोश

कोविड ने क्या कहर मचाईमची चारों तरफ़ तबाहीघर घर दे उठा दुहाई ।चार दीवारी में बंदघर पर ही TV पर सुन रहे थेमरते हुओं का आंकड़ा गिन रहे थेपीड़ा भी

मन उदास है

मन उद्विग्न है, उदास है,क्या हो रहा आसपास है।लहराता गर्व जहां झूम कर, लहूलुहान प्राचीर आज निराश है।। क्या चाह हमारी इतनी बुलंद,जहां मान की न बात है।मेरे देश के

मन कर रहा है

आज समोसा खाने कामन कर रहा है ।यार दोस्तों के संग बैठ चाय पीने कामन कर रहा है ।मुद्दत हो गई रहते अकेलेआज महफ़िल सजाने कामन कर रहा है ।इतनी

समय सबसे बलवान है।

समय सबसे बलवान है।राजा-रंक सब इसके गुलाम हैं।किसी के रोके ये रूकता नहीं।किसी की मर्जी पर ये झुकता नहीं।मनुष्य समय के हाथ का खिलौना है।बड़े-बड़ों का कद इसके सामने बौना

यही एक तमन्ना

काटा अभी तक का जीवन सोच समझकरहर लम्हा बिताया नाप तोल करठीक ग़लत का रखा हिसाबफट ना जाए कहींबचाकर रखी ज़िंदगी की किताब।धुँधली आँखों से दिख रहा हैअब इसका पन्ना

जीवन है एक पहेली

जीवन है एक पहेली।सुख-दुख है इसकी सहेली।ये जीवन खेल है धूप- छांव का।बचपन, जवानी, बुढ़ापा है पड़ाव इसका। बचपन हर ग़म से है बेगाना।जवानी है जोश और मस्ती का पैमाना।बुढ़ापा